what is the sixth sense in Hindi? | छठी इंद्री या भावना क्या है?

By | July 7, 2018

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what is the sixth sense in Hindi? | छठी इंद्री या भावना क्या है?

Sixth sense? जी हाँ शायद आज तक आप ने पाँच इंद्रीयों (senses) के बारे में सुना होगा और आप उनके बारे में और उनके काम के बारे में भी अच्छी तरह से जानते होगें। लेकिन उनकें अलावा एक और इंद्री (sense) होती है, जिसको छठी इंद्री (sixth sense) कहते है। तो आखिरकार यह छठी इंद्री (sixth sense) होती क्या है? इसका ज्वाब जानने के लिए चलिए आगे पढ़ते है।

What are sense? | इंद्रीयां क्या है?

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सबसे पहले हम पाँच इंद्रीयों (senses) के बारे में जानते है। और वो पाँच इंद्रीयों (senses) ये हैं – नेत्र, नाक, जीभ, कान और त्वचा।

  1. नेत्र (eyes) – जैसे कि आप जानते है की आँखों से हमें किसी वस्तु या व्यक्ति विशेष को देखनें का बोध होता है। तो इसीलिए आँखों को हमारी इंद्रीयां (senses) कहाँ जाता हैं।
  2. नाक (Nose) – जब किसी भी तरह की गंध को जानने का काम होता है, चाहे वह अच्छी या फिर बुरी हो तो फिर इस काम को हमारी नाक अच्छी तरह से करती है। जिसके कारण से हमें किसी गंध का अच्छी या फिर बुरी होने के बारे मे बोध होता है।
  3. जीभ (Tongue) – जीभ एक ऐसी इंद्री है जिसके द्वारा हम किसी खानें के बारे यह निर्णय लेते है कि खाना अच्छा बना है या नहीं। और हम खानें का स्वाद लेकर खा पाते हैं।
  4. कान (ear) – कान हमेशा कुछ न कुछ सुनने के लिए तैयार रहते है। शायद कोई अच्छी खबर सुनने को मिल जाए।
  5. त्वचा (skin) – जब कोई हमें स्पर्श करता है तो शारीरिक तौर पर सबसे अच्छा लगता है, आमतोर पर जब आप नय-नय किसी के साथ प्यार में होते है।

Sixth sense | छठी इंद्री

अब हम बात करते है sixth sense की, तो यह एक ऐसी sense है जो अन्य पोँचों इंद्रीयों की तरह दिखाई नहीं देती है, लेकिन इसको सिर्फ महसूस किया जा सकता है। इसको परामनोविज्ञान (Parapsychology) भी कहा जाता है। छठी इंद्री के बारे में आपने लोगों से बहुत कुछ सुना और किताबों में पढ़ा होगा और फिल्में देखी होगी। लेकिन यह होती क्या है?, कहाँ होती है और इसे कैसे जाग्रत किया जा सकता है आइए जानते हैं।

what is sixth sense? | क्या होती है छठी इंद्री?

मस्तिष्क के भीतर कपाल के नीचे एक छिद्र होता है, उसे ब्रह्मरंध्र कहते हैं, वहीं से सुषुन्मा रीढ़ से होती हुई मूलाधार तक गई है। जहाँ सहस्रकार से सुषुम्ना नाड़ी जुड़ी है। इड़ा नाड़ी शरीर के बायीं तरफ स्थित होती है तथा पिंगला नाड़ी दायीं तरफ अर्थात इड़ा नाड़ी में चंद्र स्वर और पिंगला नाड़ी में सूर्य स्वर स्थित रहता है। सुषुम्ना मध्य में स्थित है, अतः जब हमारे दोनों स्वर चलते हैं तो माना जाता है कि सुषम्ना नाड़ी सक्रिय होती है। इस सक्रियता से ही सिक्स्थ सेंस जाग्रत होता है। इड़ा, पिंगला और सुषुन्मा के अलावा पूरे शरीर में हजारों नाड़ियाँ होती हैं। उक्त सभी नाड़ियों का शुद्धि और सशक्तिकरण सिर्फ प्राणायाम और आसनों से ही होता है। शुद्धि और सशक्तिकरण के बाद ही उक्त नाड़ियों की शक्ति को जाग्रत किया जा सकता है।

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What will be if the sixth sense becomes awake? | छठी इंद्री के जाग्रत हो जाने से क्या होगा?

इससे पूर्वाभास की क्षमता बढ़ जाती है। यानि की मान लीजिए की अभी-अभी किसी व्यक्ति के साथ कुछ बुरा होता है, और वो कहता है की “मुझे पहले ही पता चल गया था कि मेरे साथ कुछ गलत होगा” बस यही पूर्वाभास है, छठी इंद्री है। इसके ही जाग्रत होने पर कोई व्यक्ति नजदीकी भविष्य की घटनाओं को जान पाने में सक्षम हो जाता है। मीलों दूर बैठे व्यक्ति की बातें सुन सकते हैं। किसके मन में क्या विचार चल रहा है इसका पता लग जाता है। छठी इंद्री के पूरी तरह से जाग्रत हो जाने पर व्यक्ति से कुछ भी छिपा नहीं रह सकता और इसकी क्षमताओं के विकास की संभावनाएं अनंत हैं।

My true story about sixth sense | मेरी सच्ची कहानी छठी इंद्री के बारे में।

मैं किसी के साथ प्यार में था और मैं एक दिन अपने दोस्त के साथ बात कर रहा था और अचानक ही मुझे पूर्वाभास होता है और मैं अपने दोस्त से कहता हूँ कि यार मुझे लग रहा है कि दो महिनों के अंदर वो मुझसे नाता तोड़ लेगी और फिर सिर्फ 10 दिन के अंदर ही वो मुझसे दुर हो गई। ऐसी बहुत सारी बातें मेरे साथ घटित हुई है, जिनको मैं किसी के साथ साझा नहीं करना चाहुँगा, क्योंकि ये दो नाईन लिखने में ही मेरी आँखे नम हो गई हैं।

How to develop the sixth sense? | छठी इंद्री को कैसे विकसित करें?

माना जाता है कि ध्यान, प्राणायम आदि के अभ्सास से हम अपनी छठी इंद्री को जाग्रत कर सकते हैं। अंतत: हमारे पीछे कोई चल रहा है या दरवाजे पर कोई खड़ा है, इस बात का हमें आभास होता है। यही आभास होने की क्षमता हमारी छठी इंद्री के होने की सूचना है। जब यह आभास होने की क्षमता बढ़ती है तो पूर्वाभास में बदल जाती है। मन की स्थिरता और उसकी शक्ति ही छठी इंद्री के विकास में सहायक सिद्ध होती है।


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