Thoughts of B. R. Ambedkar in Hindi | डाॅ. बी. आर. अम्बेडकर के सबसे अच्छे विचार

By | March 12, 2018

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Thoughts of B. R. Ambedkar in Hindi | डाॅ. बी. आर. अम्बेडकर के सबसे अच्छे विचार

Name: Dr. Bhimrao Ramji Ambedkar / Baba Saheb (डॉ.भीमराव रामजी अम्बेडकर / बाबा साहेब)
Born: 14 April 1891, Mhow, Central Provinces, British India (now in Madhya Pradesh)
Died: 6 December 1956 (aged 65) Delhi, India
Spouse(s): Ramabai (Marriage. 1906; Died. 1935), Savita Ambedkar (Dr. Sharada Kabir) married on 15 April 1948, died on May 29-2003, aged 93 at Mehrauli, New Delhi
Education: London School of Economics and Political Science (1916–1922),
Profession: Jurist, economist, politician, social reformer
Achievement: 1st Minister of Law and Justice, Bharat Ratna (posthumously in 1990), Chairman of the Constitution Drafting Committee
Signature:  Dr.ambedkar signature

Thoughts of B. R. Ambedkar in Hindi | डाॅ. बी. आर. अम्बेडकर के सबसे अच्छे विचार

1.जीवन  लम्बा  होने  की  बजाये  महान  होना  चाहिए।

2. हम  भारतीय  हैं, पहले  और   अंत  में।

3. सागर  में  मिलकर  अपनी  पहचान  खो  देने  वाली  पानी  की  एक  बूँद  के  विपरीत, इंसान  जिस  समाज  में  रहता  है  वहां  अपनी  पहचान  नहीं  खोता। इंसान  का  जीवन  स्वतंत्र  है, वो  सिर्फ  समाज  के  विकास  के  लिए  पैदा  नहीं हुआ   है। बल्कि  स्वयं  के  विकास  के  लिए  पैदा  हुआ   है।

4. पति- पत्नी  के  बीच  का  सम्बन्ध   घनिष्ट  मित्रों  के  सम्बन्ध   के  सामान  होना  चाहिए।

5. आज  भारतीय  दो  अलग -अलग  विचारधाराओं  द्वारा  शाशित  हो  रहे  हैं। उनके  राजनीतिक  आदर्श  जो  संविधान  के  प्रस्तावना  में  इंगित  हैं  वो  स्वतंत्रता, समानता, और  भाई -चारे  को स्थापित  करते  हैं। और  उनके  धर्म  में  समाहित  सामाजिक  आदर्श  इससे  इनकार  करते  हैं।

6. मैं  ऐसे  धर्म  को  मानता  हूँ  जो  स्वतंत्रता, समानता, और  भाई -चारा  सीखाये।

7. एक  सफल  क्रांति  के लिए  सिर्फ  असंतोष  का  होना  पर्याप्त  नहीं  है। जिसकी आवश्यकता  है वो है न्याय  एवं राजनीतिक और  सामाजिक  अधिकारों  में  गहरी  आस्था।

8. जो व्यक्ति अपनी मौत को हमेशा याद रखता है वह सदा अच्छे कार्य में लगा रहता है।

9. इतिहास बताता है कि जहाँ नैतिकता और अर्थशाश्त्र के बीच संघर्ष होता है वहां जीत हमेशा अर्थशाश्त्र की होती है। निहित स्वार्थों को तब तक स्वेच्छा से नहीं छोड़ा गया है जब तक कि मजबूर करने के लिए पर्याप्त बल ना लगाया गया हो।

10. बुद्धि का विकास मानव के अस्तित्व का अंतिम लक्ष्य होना चाहिए।

11.  उदासीनता लोगों को प्रभावित करने वाली सबसे खराब किस्म की बीमारी है।

12. एक सुरक्षित सेना एक सुरक्षित सीमा से बेहतर है।

13. क़ानून और व्यवस्था राजनीति रूपी शरीर की दवा है और जब राजनीति रूपी शरीर बीमार पड़ जाएँ तो दवा अवश्य दी जानी चाहिए।

14. जो धर्म जन्‍म से एक को श्रेष्‍ठ और दूसरे को नीच बनाए रखे वह धर्म नहीं गुलाम बनाए रखने का षड़यंत्र है।

15. जब  तक  आप  सामाजिक  स्वतंत्रता  नहीं  हांसिल  कर  लेते , क़ानून  आपको  जो भी  स्वतंत्रता  देता  है  वो  आपके  किसी  काम  की  नहीं।

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Dr. B.R. Ambedkar

16. अपने भाग्य के बजाय अपनी मजबूती पर विश्वास करो।

17.  जिस तरह मनुष्य नश्वर है ठीक उसी तरह विचार भी नश्वर हैं। जिस तरह पौधे को पानी की जरूरत पड़ती है,  उसी तरह एक विचार को प्रचार-प्रसार की जरुरत होती है, वरना दोनों मुरझा कर मर जाते है।

18. यदि  हम  एक   संयुक्त  एकीकृत  आधुनिक  भारत  चाहते  हैं  तो  सभी  धर्मों  के  शाश्त्रों  की  संप्रभुता  का  अंत  होना  चाहिए।

19. शिक्षा जितनी पुरूषों के लिए आवशयक है उतनी ही महिलाओं के लिए।

20. जिस प्रकार हर एक व्यक्ति यह सिद्धांत दोहराता हैं कि एक देश दूसरे देश पर शासन नहीं कर सकता, उसी तरह उसे यह भी मानना होगा कि एक वर्ग दूसरे वर्ग पर शासन नहीं कर सकता।

21. हमारे  पास  यह  स्वतंत्रता  किस  लिए  है? हमारे  पास  ये  स्वत्नत्रता  इसलिए  है  ताकि  हम  अपने  सामाजिक  व्यवस्था, जो  असमानता, भेद-भाव  और  अन्य   चीजों  से  भरी  है, जो  हमारे  मौलिक  अधिकारों  से  टकराव  में  है  को  सुधार  सकें।

22.  ज्ञान व्‍‍यक्ति के जीवन का आधार हैं।

23. यदि मुझे लगा कि संविधान का दुरुपयोग किया जा रहा है, तो मैं इसे सबसे पहले जलाऊंगा।

24. इस दुनिया में महान प्रयासों से प्राप्‍त किया गया को छोडकर और कुछ भी बहुमूल्‍य नहीं है।

25. राजनीतिक अत्याचार सामाजिक अत्याचार की तुलना में कुछ भी नहीं है और एक सुधारक जो समाज को खारिज कर देता है वो सरकार को खारिज कर देने वाले राजनीतिज्ञ से ज्यादा साहसी हैं।

26. संविधान यह एक मात्र वकीलों का दस्‍तावेज नहीं। यह जीवन का एक माध्‍यम है।

27. लोग और उनके धर्म, सामाजिक नैतिकता के आधार पर, सामाजिक मानकों द्वारा परखे जाने चाहिए। अगर धर्म को लोगों के भले के लिये आवश्यक वस्तु मान लिया जायेगा तो और किसी मानक का मतलब नहीं होगा।

28. मन की स्‍वतंत्रता ही वास्‍तविक स्‍वतंत्रता है।

29. समानता एक कल्पना हो सकती है, लेकिन फिर भी इसे एक गवर्निंग सिद्धांत रूप में स्वीकार करना होगा।

30. किसी का भी स्‍वाद बदला जा सकता है लेकिन जहर को अमृत में परिवर्तित नही किया जा सकता।

31. याय हमेशा समानता के विचार को पैदा करता है।

32. लोकतंत्र सरकार का महज एक रूप नहीं है।

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33. राष्‍ट्रवाद तभी औचित्‍य 〈Justification〉 ग्रहण कर सकता है, जब लोगों के बीच जाति, नसल या रंग का अन्‍तर भुलाकर उसमें सामाजिक भ्रातृत्‍व ( भाईचारा, Fraternity, brotherhood ) को सर्वोच्‍च स्‍थान दिया जाये।

34. अच्छा दिखने के लिए मत जिओ बल्कि अच्छा बनने के लिए जिओ।

35. जो झुक सकता है वह सारी दुनिया को झुका भी सकता है।

36. मैं राजनीति में सुख भोगने नहीं बल्कि अपने सभी दबे-कुचले भाईयों को उनके अधिकार दिलाने आया हूँ।

37. मेरे नाम की जय-जयकार करने से अच्‍छा है, मेरे बताए हुए रास्‍ते पर चलें।

38. महात्‍मा आये और चले गये परन्‍तु अछुत, अछुत ही बने हुए हैं।

39. मैं रात रातभर इसलिये जागता हूँ क्‍योंकि मेरा समाज सो रहा है।

40. जो कौम अपना इतिहास नहीं जानती, वह कौम कभी भी इतिहास नहीं बना सकती।


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