Psychologically what is love? क्या प्यार एक केमिकल लोचा है?

By | March 11, 2018

Psychologically what is love?

Psychologically what is love? क्या प्यार एक केमिकल लोचा है?

हर व्यक्ति अपनी जिंदगी में किसी न किसी के साथ प्यार करता है या प्यार में पड़ता है लेकिन कभी आपने यह सोचा कि हमें प्यार क्यों होता है हकीकत यह है कि जब इंसान प्यार में होता है तब उसके दिमाग का एक खास हिस्सा Active हो जाता है। फिर इंसान को वैसा महसूस होता है जैसा किसी नशे का सेवन करने के बाद जो अदभुत एहसास होता है और जब इंसान प्यार में होता है तो वह किसी भी हद से गुज़र जाने के लिए तैयार होता है क्योंकि उस वक्त उसके दिमाग में सामान्य लोगों की अपेक्षा कुछ अलग ही चल रहा होता है और यही बात उसे दूसरे लोगों से अलग बनाती हैं।

यह वैसे तो एक बहुत बड़ा Topic है लेकिन इस Post में हम सिर्फ यह जानेंगे की “हमें प्यार क्यों होता है?” और “ इसकी शुरुआत कहां से होती हैं?”

Why do we love? हमें प्यार क्यूँ होता है?

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प्यार के बारे में मनोवैज्ञानिक रॉबर्ट फ्रेअर (Psychologist Robert Freire) का कहना है की प्यार करने के लिए इंसान के दिमाग में मौजूद न्यूरोकेमिकल (Neurochemical) जिम्मेदार होता है और वो न्यूरोकेमिकल फेंल इथाइल एनीमा (Neurochemical Fennel Ethyl Enema) होता है। और इस रसायन के कारण व्यक्ति अपने प्रेमी की गलतियों को नज़रअंदाज़ (Ignore) कर देता है और व्यक्ति से मोहब्बत में अंतहीन खुशियां महसूस करवाता है और प्रेमी-प्रेमिका को सबसे उच्च स्थान दिलवाता है, लेकिन सच्चाई यह है कि यह रसायन हर व्यक्ति के दिमाग में होता है लेकिन जो व्यक्ति प्यार में होता है तो उस व्यक्ति के दिमाग में इस रसायन की मात्रा ज्यादा बनती है लेकिन एक सच्चाई की बात यह भी है कि इसका प्रभाव अस्थाई (करीब 2 से 3 साल तक )होता है और उस समय के बाद इसका असर कम होने लगता है और 5 से 6 साल बाद इसका असर खत्म हो जाता है। इस तरह के मामले अक्सर देखने को मिल जाते हैं।

Where does it start from? प्यार की शुरुआत कहां से होती हैं?

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मनोवैज्ञानिक आर्थर एरन (Psychologist arthur aron) का कहना है की प्यार होने के लिए संवेदनाओं के अलावा भी कई चीजें मायने रखती हैं,और उनमें से एक हैं आंखें, उन्होंने एक एक्सपेरिमेंट (Experiment) किया था। जिसमें उन्होंने कई अनजान लड़के और लड़कियों को 90 मिनट के लिए एक दूसरे के साथ बातें करने को कहा और उसके बाद उनको 4 मिनट तक एक दूसरे की आंखों में देखने के लिए कहा और उस प्रयोग (Experiment) के बाद प्रयोग (Experiment) में शामिल ज्यादातर लोगों का यह कहना था कि सामने वाले की आंखों में लगातार देखने के कारण वह उसकी ओर आकर्षित (Attract) होने लगे थे। और उस एक्सपेरिमेंट (Experiment) के बाद 4 जोड़ों ने एक दूसरे के साथ शादी कर ली और 3 रिलेशनशिप (Relationships) में रहने लगें। आंखों के बाद प्यार करने में नाक का एक अहम किरदार होता है, क्योंकि हर व्यक्ति की त्वचा से एक अलग तरह की गंध उत्पन्न होती है जो नाक से होकर के हमारे दिमाग तक पहुँचती है और फिर उसके बाद हमारा दिमाग उस गंध को डीकोड (Decode) करता है और Decode करने के बाद उस व्यक्ति के जिन्स की जांच करता है और उसके बाद हमारा दिमाग यह Decide करता है कि वह व्यक्ति अपना जीवन साथी बनाने के लिए योग्य है या नहीं।

मनोवैज्ञानिक आर्थर एरन (Psychologist arthur aron) का कहना है कि किसी भी इंसान में आकर्षण की प्रक्रिया 80 सेकंड से 4 मिनट तक शुरू हो जाती है और आकर्षण की इस प्रक्रिया में 55% योगदान हमारे शारीरिक हाव – भाव (body language) और Personality का होता है,38% बातचीत के अंदाज़ का और 7% हम बोलने में कितने कुशल है इस बात पर निर्भर करता है।


Note

मैं उम्मीद करता हूँ कि यह पोस्ट आपको जरूर पसंद आई होगी और किसी गलती के सम्मुख आने पर Please हमें Comment के माध्यम से अवगत कराएं।

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