नि:संतान के लिए केवल महिला ही जिम्मेदार नहीं

By | March 19, 2018

नि:संतान के लिए केवल महिला ही जिम्मेदार नहीं

The only female is not responsible for childless

भारत में अक्सर देखा जाता है की जब भी किसी दंपति को संतान नहीं होती है, तो सबसे पहले – समाज, दोस्त और परिवार वाले, आखिर कमी किस में है यह जाने बगैर ही पत्नी को दोषी ठहराते हैं और उसको बांझ कहकर ताने दिये जाते हैं। पुरुष की जांच तक नहीं करवाते और सारा दोष महिला पर थोप दिया जाता है। जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO)की रिपोर्ट के अनुसार पिछले एक दशक में महिलाओं की तुलना में पुरुषों में नि:संतानता के मामले बढ़े हैं। इसके सबसे बड़े कारण :- तनाव, जरूरत से ज्यादा काम करना, शहरीकरण, मिलावट और देर से शादी करना है।

विदेशों में शोध के अनुसार –

कनाड़ा में दो शोध किए गए, वर्ष 1984 में 18 से 29 साल की उम्र में 5 फ़ीसदी कपल (couple) इनफरटाइल (infertile) पाए गये। वहीं वर्ष 2010 में यह संख्या बढ़कर के 13.7 प्रतिशत हो गई थी। जानी-मानी पत्रिका ब्रिटिश मेडिकल जर्नल (British Medical Journal) के मुताबिक, पिछले 50 सालों में दुनिया भर के मर्दों में शुक्राणुओं (Sperms) की संख्या आधी रह गई है। यह एक चिंताजनक बात है।

पुरुषों में शुक्राणु कम होने के मुख्यतः ये कारण हैं –

गर्मी भी है हानिकारक – ऐसे व्यक्ति जो सीधे गर्म वातावरण के संपर्क में रहते हैं या काम करते हैं, जैसे कि:- हलवाई और सोनार जैसे लोगों में, क्योंकि इनका कार्य भट्टी के नजदीक होता है और भट्टी की गर्मी से अंडकोष में शुक्राणुओं की संख्या में गिरावट देखी गई है।

बचपन में दे ध्यान – बच्चों के अंडकोष देखें की दोनों अंडकोष थैली में है या नहीं अन्यथा कभी – कभी एक अथवा दोनों थैली में नीचे नहीं आते हैं और शरीर की गर्मी से अंडकोष खराब हो जाते हैं इस तरह के बच्चे भी बड़े होकर के नि:संतानता के शिकार हो जाते हैं।

जंक फूड से रहे दूर – जंक फूड, रसायन मिश्रित खाद्य पदार्थों, फास्ट फूड का ज्यादा सेवन करने से विटामिन (Vitamins) की कमी हो जाती है जिससे शुक्राणुओं की मोटिलिटी (Motility – गतिशीलता) में कमी आ जाती है।

नशे से रहे दूर – व्यसन (Addiction) – शराब, धूम्रपान एवं अन्य कोई नशा करने पर भी शुक्राणु कम हो जाते हैं। जरूरत से ज्यादा शराब नहीं पीनी चाहिए क्योंकि इसके अधिक सेवन से शुक्राणुओं की संख्या में कमी आ जाति हैं।

मोटापे से बचें – आदमियों की प्रजनन क्षमता महिलाओं के मुकाबले 20 फ़ीसदी कम होती है। जहां तक संभव है मोटापे को कम करें क्योंकि ज्यादा वजन से हार्मोनल असंतुलन (Hormonal Imbalance) होता है, इससे शुक्राणु (Sperm) बनने में दिक्कत आती है।

समय पर शादी को दें प्राथमिकता – केरियर के चलते शादी की उम्र ज्यादा हो जाने से शुक्राणुओं की संख्या और गुणवत्ता में कमी आ जाती है।

जेब में मोबाइल न रखें – मोबाइल तो आज – कल हर किसी की जरूरत बन गई है, लेकिन फिर भी जहां तक हो सकें इस से दूरी बनाए रखें, क्योंकि मोबाइल से निकलने वाले रेडिएशन तथा लगातार पैरों पर लैपटॉप रखकर काम करने वाले पुरुषों में भी शुक्राणुओं की संख्या और गुणवत्ता में कमी आ जाती है।

और चिकित्सकीय कारण

  1. अंडकोष में किसी तरह का संक्रमण का होना
  2. अंडकोष की नस में सूजन होना
  3. पुरुष में टेस्टोस्टीरोन हार्मोन की कमी के कारण शुक्राणुओं की संख्या में कमी आती है
  4. कुछ दवाओं का अधिक सेवन से भी शुक्राणुओं की संख्या में कमी आती है जैसे कि – स्टीरॉयड (Steroids), कीमोथैरेपी (chemotherapy), एंटीफंगल (anti-fungal)।
  5. यौन संक्रमित बीमारियां – सिर्फ एड्स ही नहीं बल्कि दर्जनों बीमारियां हैं, जो असुरक्षित यौन संबंध बनाने से हो जाती हैं तथा यह इनफर्टिलिटी (Infertility) का बड़ा कारण हैं। कुछ अन्य बीमारियां जैसे – मम्स, टीबी, ब्रूसीलोसिस (Brussilosis), गोनिया (Gonia), टाइफाइड (Typhoid), इंफ्लुएंजा (Influenza), स्माॅलपाॅक्स (Smallpox) आदि के कारण भी स्पर्म काउंट (Sperm count) कम हो जाते हैं।

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