महात्मा ज्योतिबा फुले | Mahatma Jyotiba Phule Biography in Hindi

By | April 14, 2018

Mahatma Jyotiba Phule in hindi

Mahatma Jyotiba Phule Biography in Hindi | महात्मा ज्योतिबा फुले

Mahatma Jyotiba Phule Biography in Hindi । ज्योतिराव गोविंदराव फुले (Jyotirao Govindrao Phule) 19वीं सदी के एक महान भारतीय विचारक, समाजसेवी, लेखक, दार्शनिक तथा क्रान्तिकारी कार्यकर्ता थे। उसको महात्मा ज्योतिबा फुले (Mahatma Jyotiba Phule) के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने भारतीय समाज में फैली अनेक बुराइयों को दूर करने के लिए अपनी जिंदगी में लगातार संघर्ष किया। उन्होंने दलितों व महिलाओं के सुधार के लिए बहुत सारे कार्य किए। उन्होंने 24 सितम्बर सन् 1873 को महाराष्ट्र में “सत्य शोधक समाज” नामक संस्था कि स्थापना की। उन्होंने सभी वर्गों को शिक्षित बनाने के लिए और भारतीय समाज में फैले जातिवाद और भेदभाव के विरुद्ध कार्य किया। वह बाल-विवाह के मुखर विरोधी और विधवा-विवाह के पुरजोर समर्थक थे।

Mahatma Jyotiba Phule Biography in Hindi | महात्मा ज्योतिबा फुले

Birth – जन्म:- 11 April 1827

Died – निधन:- 28 नवम्बर 1890

Spouse – पत्नी / जीवनसाथी:- सावित्रीबाई ज्योतिराव फुले

Religious Affiliation – धार्मिक मान्यता:- सत्यशोधक समाज

Other names – दुसरे नाम:- ज्योतिबा फुले | महात्मा फुले | ज्योतिराव फुले

Mahatma Jyotiba Phule Biography in Hindi | महात्मा ज्योतिबा फुले


Early life – प्रारंभिक जीवन

ज्योतिराव गोविंदराव फुले का जन्म 11 अप्रैल 1827 ई. को पुणे, महाराष्ट्र में माली जाति से संबंध रखने वाले परिवार में हुआ था। उनका परिवार कई पीढ़ी पहले सतारा से पुणे आकर फूलों के गजरे आदि बनाने का काम करने लगा था। इसलिए माली के काम में लगे ये लोग ‘फुले’ के नाम से जाने जाते थे। हिंदू धर्म में माली को शूद्र समझा जाता है। उन्होंने पहले मराठी में अध्ययन किया, बीच में पढाई छूट जाने के कारण फिर बाद में 21 वर्ष की उम्र में अंग्रेजी की सातवीं कक्षा की पढाई पूरी की।

Famly – परिवार

ज्योतिबा फुले का पिता गोविंद्राव ने चिमनाबाई (Chimnabai) से शादी की और उनके दो बेटे हुए, जिनमें से ज्योतिबा फुले छोटे थे। जब ज्योतिबा फुले की आयु एक वर्ष थी उस वक्त उसकी माता चिमनाबाई (Chimnabai) का निधन हो गया था। ज्योतिबा फुले का पालन-पौषण सगुनाबाई नाम की एक दाई ने किया। सगुनाबाई ने ही उन्हें माँ की ममता और दुलार दिया। ज्योतिबा फुले का 13 वर्ष की आयु में अपने पिता के द्वारा पसंद की गई लड़की से 1840 में शादी की, जो कि उन ही की जात कि थी। जिसका नाम सावित्री बाई था। जो बाद में स्‍वयं एक प्रसिद्ध समाजसेवी बनीं। दलित व महिला शिक्षा के क्षेत्र में दोनों पति-पत्‍नी ने मिलकर काम किया।

School Establishment – विद्यालय की स्थापना

ज्योतिबा फुले ने सन् 1848 में, 23 वर्ष कि आयु में अहमदनगर में ईसाई धर्म-प्रचारकों के द्वारा चलाया जा रहा पहला लड़कियों का स्कूल का दौरा किया। उन्होंने सन् 1848 में थॉमस पेन (Thomas Paine) की पुस्तक राइट्स ऑफ मैन (Rights of Man) को पढ़ा और सामाजिक न्याय की गहरी समझ विकसित की। उन्हें एहसास हुआ कि भारतीय समाज में निचली जातियों और महिलाओं का नुकसान हुआ है, और शिक्षा ही इन वर्गों का उद्धार करने लिए महत्वपूर्ण थी। स्त्रियों की दशा सुधारने और उनकी शिक्षा के लिए ज्योतिबा ने 1848 में एक स्कूल खोला। यह इस काम के लिए देश में पहला स्वदेशी विद्यालय था। लड़कियों को पढ़ाने के लिए अध्यापिका नहीं मिली तो उन्होंने कुछ दिन स्वयं अपनी पत्नी सावित्री को पढ़ना और लिखना सिखा कर इस योग्य बना दिया की वह दूसरी महिलाओं को पढ़ा सके। बाद में उन्होंने अपने परिसर में महार और मांगी जातियों के बच्चों को पढ़ाने लिए स्कूल शुरू किया, उन दोनों जातियों को अछूत (untouchable) माना जाता था। कुछ लोगों ने आरंभ से ही उनके काम में बाधा डालने की चेष्टा की, किंतु जब फुले आगे बढ़ते ही गए तो उनके पिता पर दबाब डालकर पति-पत्नी को घर से निकलवा दिया इससे कुछ समय के लिए उनका काम रुका जरूर, पर शीघ्र ही उन्होंने एक के बाद एक लड़कियों के लिए तीन स्कूल खोल दिए।

ज्योतिबा ने ब्राह्मण-पुरोहित के बिना ही विवाह-संस्कार आरंभ कराया और इसे मुंबई हाईकोर्ट से मान्यता भी मिली। महात्मा ज्योतिबा फुले व उनके संगठन के संघर्ष के कारण सरकार ने ‘एग्रीकल्चर एक्ट’ पास किया। धर्म, समाज और परम्पराओं के सत्य को सामने लाने हेतु उन्होंने अनेक पुस्तकें भी लिखी। 28 नवम्बर सन् 1890 को उनका देहांत हो गया।


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