Babasaheb Bhimrao Ambedkar Biography in hindi | बाबा साहब भीमराव अंबेडकर का जीवन परिचय

By | March 29, 2018

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Babasaheb Bhimrao Ambedkar Biography in hindi

बाबा साहब भीमराव अंबेडकर का जीवन परिचय

Bhimrao Ramji Ambedkar भारत के न्यायशास्त्री ( jurist), अर्थशास्त्री (economist), राजनीतिज्ञ (politician) और समाज सुधारक (social Reformer) थे। जिन्होंने दलित बौद्ध आंदोलन को प्रेरित किया और अछूतों (दलितों) के साथ होने वाले सामाजिक भेदभाव के खिलाफ अभियान चलाया, जबकि महिलाओं और मजदूर के अधिकारों का भी समर्थन किया। Baba Saheb ने भारत के संविधान को लिखने के साथ साथ इस देश के दलित वर्ग को सामाजिक जंजीरों से आजाद होने में अहम भूमिका निभाई है।

Name: Dr. Bhimrao Ramji Ambedkar / Baba Saheb (डॉ.भीमराव रामजी अम्बेडकर / बाबा साहेब)
Born: 14 April 1891, Mhow, Central Provinces, British India (now in Madhya Pradesh)
Died: 6 December 1956 (aged 65) Delhi, India
Spouse(s): Ramabai (Marriage. 1906; Died. 1935), Savita Ambedkar (Dr. Sharada Kabir) married on 15 April 1948, died on May 29-2003, aged 93 at Mehrauli, New Delhi
Education: London School of Economics and Political Science (1916–1922),
Profession: Jurist, economist, politician, social reformer
Achievement: 1st Minister of Law and Justice, Bharat Ratna (posthumously in 1990), Chairman of the Constitution Drafting Committee
Signature:  Dr.ambedkar signature

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बाबा साहब भीमराव अंबेडकर का परिवार

भीमराव अंबेडकर का जन्म एक मराठी परिवार में हुआ था। उनके पिताजी का नाम “रामजी मालोजी सकपाल” जो कि ब्रिटिश आर्मी में एक सूबेदार थे, उनकी माता जी का नाम भीमाबाई था। B. R. Ambedkar अपने मां-बाप के 14 वें अंतिम संतान थे।

जन्म और मृत्यु – Birth and death of Dr. Ambedkar

Dr. B.R. Ambedkar का जन्म 14 अप्रैल सन 1891 में ब्रिटिश भारत के मध्य भारत प्रांत ( आधुनिक भारत के मध्यप्रदेश में ) में स्थित नगर सैन्य छावनी महू में हुआ था। बाबा साहब एक मराठी और महार ( दलित ) परिवार से थे, जोकि आंबडवे गांव जो आधुनिक महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले में स्थित है। बाबा साहब 1948 से मधुमेह से पीड़ित थे। 1954 में जून से लेकर अक्टूबर तक बाबा साहब काफी बीमार रहे इस दौरान उनकी नजर भी कमजोर हो गई थी। अपनी आखरी पांडुलिपि बुद्ध और उनके धम्म को पूरा करने के 3 दिन बाद ही 6 दिसम्बर 1956 को बाबा साहब का दिल्ली में अपने घर पर सोते वक्त ही निधन हो गया था। बाबा साहब का मुंबई में चौपाटी समुंदर तट पर 7 दिसंबर 1956 को बौद्ध संस्कारों के अनुसार अंतिम संस्कार किया गया। बाबा साहब के अंतिम संस्कार के दौरान करीब दस लाख बाबा के अनुयायियों ने बाबा को साक्षी मानकर बौद्ध धर्म की दीक्षा ग्रहण की थी।

राजनीतिक कैरियर – Political career

डॉक्टर अंबेडकर ने 1936 में “स्वतंत्र लेबर पार्टी” की स्थापना की, बाबा साहेब की पार्टी ने 1937 में 15 सीटों की जीत मिली। बाद में अम्बेडकर ने अपनी राजनीतिक पार्टी को अखिल भारतीय अनुसूचित जाति फेडरेशन में बदल दिया, हालांकि 1946 में आयोजित भारत के संविधान सभा के लिए हुये चुनाव में इसने खराब प्रदर्शन किया।

अंबेडकर की शादी – Ambedkar’s marriage

1906 में जब बाबा साहब 15 वर्ष के थे तो उस समय उनकी शादी 9 वर्ष की लड़की के साथ कर दी गई थी जिसका नाम रामाबाई था, सन 1935 में लंबे समय तक बीमार रहने के कारण अंबेडकर की पहली पत्नी रामाबाई का निधन हो गया था। 1940 के दशक के अंत में भारत के संविधान का मसौदा पूरा करने के बाद, वह नींद की कमी से पीड़ित हो गए थे, उसके पैरों में तंत्रिकाविकृति (neuropathic ) दर्द था। वह insulin और homeopathic दवाइयां ले रहे थे। वह अपना इलाज करवाने के लिए मुंबई चले गए और वहां पर डॉक्टर शारदा कबीर से मिले फिर उन्होंने 15 अप्रैल 1948 को दिल्ली में अपने घर पर शारदा से शादी कर ली। शारदा कबीर ने बाद में अपना नाम सविता अंबेडकर रख लिया जिनको माई और माई साहब भी कहा जाता था। जिनका 29 मई 2003 को 93 साल की उम्र में महरौली नई दिल्ली में निधन हो गया।

बौद्ध धर्म में रूपांतरण – Conversion to Buddhism

उन दिनों दलितों के प्रति छुआछूत या भेदभाव के कारण बाबा साहेब के मन में हिंदू धर्म के प्रति नफरत दिनों दिन बढ़ती जा रही थी इसी कारण डॉक्टर भीमराव अंबेडकर का लगाव भगवान गौतम बुद्ध की ओर हुआ। वह शांति और न्याय चाहते थे। सन् 1950 में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी बौद्ध सम्मेलन में भाग लेने के लिए श्रीलंका गए। वह हिंदू धर्म को त्यागना चाहते थे परंतु वह मुसलमान या ईसाई धर्म को स्वीकार करने के लिए भी तैयार नहीं थे। उनका कहना था कि “ यदि हम इस्लाम या इसाई धर्म स्वीकार करेंगे तो भारतीयता में अंतर आ जाएगा । हमारे सिर मक्का मदीना और येरुशलम की ओर झुकने रखेंगे। यदि हम इस्लाम मजहब कबूल करते हैं तो मुसलमानों की संख्या बेतहाशा बढ़ने लगेगी और हमारे मुल्क भारत के लिए खतरा उत्पन्न हो जाएगा, अगर हम ईसाई धर्म को स्वीकार करते हैं तो भारत में विदेशियों की सता मजबूत हो जायेगी, अगर सिख धर्म कि बात जाये तो यह अवश्य हि भारतीय संत धर्म है:- इसको स्वीकार करने से हमारी भारतीयता में कोई अंतर नहीं आता। परंतु इन सभी धर्मों कि तुलना में बौद्ध धर्म हमारे लिए कही अधिक उपयोगी और स्वीकार करनें के लायक है। इसे स्वीकार करने से हमारी प्राचीन भारतीय संस्कृति सुरक्षित रहेगी और इसमे जाती भेद नहीं है, न ही इसमें भगवान का झंझट है और नहीं धार्मिक ग्रंथ का आतंक है इसका व्यापक साहित्य है। इसके पूरे संसार में पहले होने से विश्व के लोगों के साथ हमारा भाईचारा स्थापित होता है। यह भारतीय वातावरण में उत्पन्न हुआ है।” इस प्रकार डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने ‘बुद्धं शरणं गच्छामि’ कहते हुए बौद्ध धर्म स्वीकार करने का निर्णय लिया । बाबा साहेब का अपने जीवन में यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण फैसला था। बाबा साहब ने अपने बहुत से अनुयायियों के साथ बौद्ध धर्म ग्रहण कर लिया और बौद्ध बन गए। दिनांक 14 अक्टूबर सन 1956 नागपुर में एक विशाल समारोह में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने अपनी पत्नी सहित बौद्ध धर्म की दीक्षा प्राप्त की थी। इसके बाद 6 दिसंबर सन 1956 को डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने इस संसार को छोड़कर स्वर्ग सिधार गए।


दलितों के आध्यात्मिक पथ-प्रदर्शक व पावन देवता, शिक्षाविद्, राष्ट्रीय एकता के पक्षधर तथा समाज सुधारक बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर वास्तव में ही आधुनिक भारत के अग्रणी महापुरुष थे और ऐसे महापुरुष के संदर्भ में हमने इस वेबसाइट पर कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां एकत्रित करने की कोशिश की है, अगर आपको अच्छा लगता है तो इस वेबसाइट को अपने दोस्तों के साथ Share करके, हमारा सहयोग करें।

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