BooksWord’s experience in hindi | अनुभव की माला

By | April 24, 2018

BooksWord’s experience

हर व्यक्ति अपने भूतकाल से प्राप्त किए गय अनुभवों के हिसाब से अपनी जीन्दगी जीने का प्रयास करता है और अपने अनुभवों के बल-बूते पर दूसरों को सलाह देता है। तो इसीलिए हमनें यहाँ पर अपने कुछ अनुभव आप के साथ शेयर कर रहें है।

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1. एक भगवान के सिवाय ऐसी कोई चीज है ही नहीं जो सदा हमारे साथ रहे और हम सदा उसके साथ रहे।

2. करना चाहते हो तो सेवा करों, जानना चाहते हो तो खुद को जानों, मानना चाहते हो तो प्रभु को मानो।

3. मनुष्य संसार में जितनी चीजों को अपनी और अपने लिए मानता है, उतना ही वह फँसता है।

4. शुभ क्रम करने का स्वभाव ऐसा सुंदर धन है कि जिसे न शत्रु छीन सकता है और न चोर चुरा सकता है।

5. संसार तथा शरीर कभी भी हमारे साथ नही रहे और परमात्मा कभी भी हमारे से अलग नहीं हुए।

6. प्रत्येक मनुष्य को भगवान कि तरफ चलना ही पड़ेगा, चाहे आज चले या फिर अनेक जन्मों के बाद, तो फिर देरी क्यों?

7. धन से वस्तु श्रेष्ठ है, वस्तु से मनुष्य श्रेष्ठ है, मनुष्य से विवेक श्रेष्ठ है और विवेक से भी परमात्मा श्रेष्ठ है।

8. धन सम्पति अधिक होने से हम सुखी आनन्द से रहेंगे, इस वहम् भ्रान्ति ने ही हमें नाशवान पदार्थों का दास बना रखा है।

9. सुख की इच्छा, आशा और भोग ये तीनों सम्पूर्ण दुखों के कारण है।

10. करने में तत्परता से अपना कर्तव्य का पालन करना चाहिए और होने में हर समय खुश रहना चाहिए।

11. जब तक कामना है, तब तक चिन्ता नहीं मिट सकती।

12. जो जीवन दूसरों के लिए उपयोगी हो जाता है उसका परिणाम अपने लिए भी उपयोगी होता है।

13. दूसरों को खुश देखकर खुश होना और दुखी देखकर दुखी होना उसकी सेवा है।

14. जो आदमी बदले कि भावना को बनाए रखता है, वह अपनें जख्मों को हरा रखता है।

15. बोलने से पहले एक बार सोंचे, लिखने से पहले दो बार सोंचे, और करने से पहले तीन बार सोंचे।

16. घर में मेल-मिलाप होना पृथ्वी पर स्वर्ग के समान है।

17. चिनता उसकी कीजिए जो अनहोनी सो होए। उसकी चिन्ता क्या करे, जो होनहार से होए।

18. व्यवस्था घर की शाेभा है।

19. इतना मत खरचों की करजा हो।

20. इतना मत कमाओं कि पाप हो।

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21. इतना मत खाओं कि रोग हो।

22. इतना मत बोंलो कि क्लेश हो।

23. समय से पहले और भाग्य से ज्यादा किसी को कुछ नही मिलता।

24. यह नियम बना लें कि अगर कोई हमारे मन की बात पूरी न करें तो हम नाराज नहीं होंगे।

25. गरीबी में जीने से ही, अमीर बनता है।

26. महान आदमी की महानता का पता इस बात से चलता है कि वह छोटे आदमी से कैसे पेश आता है।

27. बुरा कहलाना अच्छा है, परन्तु अच्छा कहलाकर बुरा बने रहना बहुत ही बुरा है।

28. गुण न हो तो रूप व्यर्थ है।

29. विनम्रता न हो तो विद्या व्यर्थ है।

30. उपयोग न आये तो धन व्यर्थ है।

31. साहस न हो तो हथियार व्यर्थ है।

32. भुख न हो तो भोजन व्यर्थ है।

33. होश न हो तो जोश व्यर्थ है।

34. परोपकार न करने वाले का जीवन व्यर्थ है।

35. प्रतिदिन एक नेक काम करना चाहिए।

36. जो पैसे का हिसाब नहीं रखेंगा, वो व्यक्ति खत्म (निर्धन) हो जायेगा।

37. रिश्तेंदारों से मेल रखना बहुत जरूरी है।

38. बच्चों को शिष्टाचार सिखाना बहुत जरूरी है, शिष्टाचार से उसकी शोभा कई गुणा बढ़ जाती है।

39. बचत जैसा नफा इस दुनिया में और कोई भी नहीं है।

40. सबसे ऊँचा पहुँचने के लिए सबसे नीचे से चलना पड़ेगा।

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41. ब्याज खाआे, मूल न खाओ।

42. गरीबी ज्यादा पैसे कमाने से दूर नही होती बल्कि पैसों की बचत और कम खर्च करने से दूर होती है।

43. आदमी अच्छें कपड़े पहनें से नही बनता, बल्कि अच्छे कर्म करने से बनता है।

44. सादा पहनने वाला, कम खानें वाला और गम खाने वाला आदमी सुखी रहता है।

45. जो आदमी गलत होगा, वह खुद ही बिरादरी में नहीं बैठ पाता है।

46. सबसे ऊपर की मंजिल से गिरा हुआ इंसान बच सकता है, परन्तु जो निगाहों से गिर जाता है, वह नही बच सकता।

47. माँ-बाप 7 बेटे भी पालते है परन्तु 7 बेटों से माँ-बाप पालने मुश्किल नजर आते हैं।

48. जमाने की चक्की उसे देती है पीस, जिसकी आमदनी हो 19 और खर्चा हो 20।

49. महल में रहने की बजाए, झोपड़ी में रहने से सुख ज्यादा मिलता है यदि झोपड़ी आपकी अपनी हो।

50. जो आदमी वीश्वास खो बैठता है, वह सब कुछ खो देता है।

51. मुझे ये ना बताओ कि तुमने कितना काम किया, परन्तु यह बताओ कि तुमने कितना काम करवाया।

52. दुनिया में दिमाग एक ऐसी मशीन है जो चलाने से घिसती नहीं बल्कि बढ़ती है।

53. मन के संकल्पों को बीच-बीच में रोकने का अभ्यास कर लें तो थकावट नहीं होती।

54. परमात्मा को अपना साथी बना लें तो चिंता की रखायें, चेहरे पर नहीं आयेगी।

55. जब दूसरे गलतियाँ करते हैं तो उनको गिनते न रहिए। उनका विश्वास जीतिये ताकि आप उनकी कमजोरी को मिटानें में सहयोग दे सकें।

56. गलतफहमी प्रेमपूर्ण व शुद्ध विचारों से तथा समुचित समय पर सही ज्ञान देकर दूर की जा सकती है।

57. यदि हमारे पैर फिसल जाये तो हम सम्भल सकतें है, परन्तु जुबान फिसल जाये तो यह गहरा घाव कर देती है। इसलिए सावधान रहिये।

58. सुन्दरता व गुणों कि ओर हर व्यक्ति आकर्षित होता है। कुरूप व अयोग्य की सहायता करना एक दुर्लभ गुण है।

59. यदि आपने लेकर वापिस करना है, तो दुनिया का धन आपका है।

60. दीवार से भी सलाह कर के काम करना चाहिए।

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61. किसी को जलाने से पहले इन्सान आप जलता है, फिर दूसरे को जलाता है।

62. जहाँ से उठाएँ वही रखें। यह आदत पड़ने से कई दुख दूर होते है।

63. पढ़ाई और कमाई का कोई मेल नहीं है।

64. बदबू को बदबू से दूर नहीं कर सकते पर खुशबू से बदबू दूर हो जाती है।

65. बीमारी और दुश्मन को कभी छोटा मत समझों।

66. दोस्ती करों छान कर, दुश्मनी करों जान कर।

67. अधिक शराफत नाम तो देती है, पर बाकी सब कुछ छीन लेती है।

68. एक बार निकले बोल वापिस नहीं आ सकते, इसीलिए सोच कर बोलो।

69. तलवार की चोट इतनी तेज नही होती, जितनी कि जुबान की।

70. शुभ कामना रुपी उपहार सब को दें।

71. मनुश्य के तीन सद् गुण है आशा, विश्वास और दान।

72. दूसरों के प्रति वैसा व्यवहार करना चाहिए, जिसे हम अपने लिए पसन्द करें।

73. दूसरों के हित के लिए अपने सुख का भी त्याग करना ही सच्ची सेवा है।

74. आलसी को सब काम कठिन लगते है और महनती को आसान।

75. भूत से प्रेणा लेकर वर्तमान में भविश्य का चिन्तन करना चाहिए।

76. बुद्धिमान दूसरों की त्रृटियों से अपनी त्रृटियों को सुधारतें हैं।

77. प्रेम मनुश्य को अपनी ओर खींचने वाला चुम्बक है।

78. धीरज के सामने भयंकर संकट भी धुंए के बादलों के समान उड़ जाते है।

79. क्रोध मूर्खता से आरम्भ होता है और पश्चाताप पर समाप्त होता है।

80. इरादे की मजबूती का नाम तकदीर है।

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81. बच्चा जब हर बात समझने लगता है तब माँ-बाप की भी नहीम सुनता, इसलिए बचपन में ही जो गुण डालनें है, डाल दें।

82. अभिमान रूपी सिर रखते है तो इज्जत रूपी सर चला जाता है।

83. निद्रा तथा मदिरा उन्नति में बाधक है।

84. व्यक्ति के कर्म चरित्र का दर्पण है।

85. आपके अपने स्वभाव के सिवाय कोई आपको दुख नहीं दे सकता, अपना स्वभाव मधुर बनाये।

86. मन कि स्थिति ठीक हो तो बाकी सब स्थितियाँ अपने आप ठीक हो जाती है।

87. बदला ना लो, बदल कर दिखाओं।

88. दूसरे के गुण देखें, अवगुण कभी न देखें, मनुष्य को गुणग्राही होना चाहिए।

89. जीवन एक अवसर है, इसे खोइये मत।

90. जीवन एक चुनौती है, इसे स्वीकार कीजिए।

91. जीवन एक सफर है, इसे पूरा कीजिए।

92. जीवन एक आत्मा है, इसका बोध कीजिए।

93. जीवन एक अनुभव है, इसे सोचिए।

94. जीवन एक संघर्ष है, इसे द्वन्द्व कीजिए।

95. एकाग्रता से ही सम्पूर्ण आन्नद प्राप्त हो सकता है।

96. कभी-कभी सम्मान देना ही सबसे बड़ा योगदान सिद्ध होता है।

97. सबसे बड़ी सेवा है जीवन की खुशियों को दूसरों के साथ बाँटना।

98. जीवन एक कर्तव्य है, इसका पालन कीजिए।

99. दूसरों की गलती सहन करना एक बात है, पर उन्हें माफ कर देना और भी महान बात है।

100. दूसरों को बदलने का प्रयत्न करने के बजाए स्वयं को बदल लेना कहीं अधिक अच्छा है।


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