3 Types of love in Hindi ! प्यार के 3 प्रकार

By | March 14, 2018

Types of love in hindi

3 Types of love in Hindi! प्यार के 3 प्रकार

अक्सर लोग पहली नज़र में किसी से प्यार कर बैठते हैं और वह प्यार किस तरह का है यह हमारे लिए समझना जरूरी हो जाता है, कि कहीं सामने वाला हमसे सुख सुविधाओं और शारीरिक चाहत के लिए तो प्रेम नहीं करता, क्योंकि अक्सर लोग पहली नज़र में प्रेम को अनुभव करते है और फिर जैसे-जैसे समय गुजरता है, यह कम होने लगता हैं। प्रेम में तो हमेशा नयापन और घनिष्ठता बरकरार रहनी चाहिए।

Attraction – वो प्यार जो आकर्षण से मिलता है, इसको हम तन की चाहत भी कह सकते हैं।

Attraction | love types in hindi

Attraction of love

वह प्यार जो आकर्षण के कारण होता है वह कुछ समय के लिए होता है क्योंकि वह अनभिज्ञ या सम्मोहन के कारण होता है और इस तरह का प्रेम लंबे समय तक नहीं रहता, क्योंकि इसकी बुनियाद आकर्षण पर टिकी होती है। इसीलिए इसमें आपका आकर्षण से जल्दी ही मोह भंग हो जाता है और आप Bore हो जाते हैं और इसके बाद आपके साथी से आकर्षण खत्म होने की वजह से आपका प्रेम धीरे धीरे खत्म होने लगता है इसीलिए यह सच्चा प्यार नहीं है। इस प्यार को हम वासना भी कह सकते हैं, जो सेक्स Hormone Testosterone Estrogen नाम के रसायन से पैदा होती है।और यह Hormone (Testosterone) सिर्फ पुरुषो में ही नहीं होता, बल्कि महिलाओं में भी उतना ही एक्टिव (Active) होता है।और इस रसायन का कार्य हमें अपने पार्टनर के साथ समय बिताने और उसके साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाने के लिए प्रेरित करना होता है।

Amenity love, Pleasure – वो प्यार जो सुख-सुविधा से मिलता है।

Amenity love in hindi

Amenity love

एक वो प्रेम होता है जो सुख-सुविधाओं से मिलता है वह प्रेम घनिष्टता (Intimacy, Closeness) लाता है परंतु इस प्रेम में किसी प्रकार का जोश, उत्साह, या आनंद नहीं होता है, क्योंकि इस प्रेम की बुनियाद ही सुख-सुविधाओं पर आधारित होती है और उन सुख सुविधाओं के कारण ही कोई आप से प्रेम के लिए प्रस्ताव रखता है, और इस बात का उदाहरण भी आपको अपने आस-पास ही देखने को मिल जाएगा।

Divine love – दिव्य प्रेम।

Divine love in hindi

Divine love

जब दिव्य प्रेम की बात आती है तो यह Attraction and Amenity love दोनों को पीछे छोड़ देता है यह हमेशा-हमेशा के लिए नवीनतम रहता है। आप जितना इसके निकट जाएँगे उतना ही इसमें अधिक आकर्षण और गहनता (Intensity) आती है। इसमें कभी भी उबासी (yawning gap) नहीं आती हैं और यह हर किसी को उत्साहित रखता है। सांसारिक प्रेम सागर के जैसा हैं, परन्तु सागर की भी सतह (Surface) होती है। दिव्य प्रेम आकाश की तरह होता है, जिसको कोई नाप नहीं सकता और जिसकी कोई सीमा नहीं है। सागर की सतह से आकाश की तरफ ऊँची उड़ान को भरे। प्राचीन प्रेम इन सभी संबंधो से परे हैं और इसमें सभी सम्बन्ध सम्मलित होते है।


Note

मैं उम्मीद करता हूँ कि यह पोस्ट आपको जरूर पसंद आई होगी और किसी गलती के सम्मुख आने पर Please हमें Comment के माध्यम से अवगत कराएं।

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